Poetry

Tum Paddar Ho Mere – A poem by Ashish Chouhan

मनुष्य स्वंय कुछ नहीं करता, भाव उस से सब कुछ करवाते हैं फिर वो प्रेमिका को प्रति हों या फिर अपनी जन्म भूमि के प्रति भाव सब कुछ कह जाते हैं। अपनी जन्मभूमि को समर्पित ये भाव , जब कलम के माध्यम से निकलें तो वो कविता का रूप ले लेते हैं, मैने भी स्वयं …

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